पठानकोट-जालंधर नेशनल हाइवे के बीच स्थित पांच फुट से बीस फुट तक चौड़े डिवाइडरों में यूं तो पौधरोपण पर्यावरण संरक्षण के लिए किया गया था परंतु रख-रखाव के अभाव में अब इन डिवाइडरों की सफाई करने की बजाए उसमें उग चुके फालतू घास-फूस को आग के हवाले किया जा रहा है। इस आग से डिवाइडर के बीच का घास-फूस जहां पूरी तरह राख हो गया है वहीं इस घास के बीच लगे सैकड़ों पौधे भी सूख चुके हैं।
आग लगा कर नेशनल हाईवे के डिवाइडर को साफ करने का तरीका हाईवे का ठेका लेने वाली कंपनियां कर रही हैं। इस काम पर पैनी निगाह नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को रखनी है परंतु जिस प्रकार ठेका लेने वाली कंपनी इस मामले में पूरी तरह चुप है ठीक उसी प्रकार नेशनल हाईवे अथार्टी ने भी इस आग के प्रति अपनी आंखें मूंद ली हैं।
परिणाम स्वरूप पठानकोट-जालंधर के बीच एक सौ किलोमीटर लंबे नेशनल के बीच जगह-जगह आग लगाए जाने का सिलसिला जारी है।
अभी तक बीस किलोमीटर से भी ज्यादा लंबे डिवाइडर आग के हवाले हो चुके हैं। इस ओर अगर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो नेशनल हाईवे अथॉरिटी की नाक तले पर्यावरण संरक्षण का सपना चकना चूर हो जाएगा।
इस संबंध में नेशनल हाईवे अथॉरिटी के सर्कल हेड एनके जैन से बात की गई तो उन्होंने हाइवे का ठेका लेकर टोल प्लाजा के जरिए उगाही करने वाले ठेकेदारों को क्लीन चिट देते हुए कहा कि इसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार को आग लगाने का कोई लाभ नहीं मिलता है।
इसके साथ ही उन्होंने माना कि यह आग हर साल लगती है और इसके पीछे जो लोग काम करते हैं वह उनके खिलाफ एक्शन लेंगे।
पीटीके-54
डिवाइडर पर आग लगाना गैर कानूनी : डिप्टी कमिश्नर
हाईवे के डिवाइडर पर आग लगाना गैर कानूनी है। सरकार ने कचरे तक को आग लगाने पर पाबंदी लगा रखी है। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। बावजूद इसके अगर नेशनल हाईवे के डिवाइडर को आग के हवाले किया गया है तो प्रशासन की इसकी रिपोर्ट तलब करेगा। विभाग के अधिकारियों इसकी पड़ताल की जाएगी। कहीं लापरवाही पाई गई तो सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। यह प्रतिक्रिया पठानकोट की डिप्टी कमिश्नर नीलिमा ने दी। उन्होंने कहा कि पर्यवरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है।
जानलेवा है हाईवे के डिवाइडर को आग लगना
लेबर तथा माली को साथ लेकर नेशनल हाईवे के बीच बने डिवाइडर के घास-फूस को साफ करने की बजाए आग लगा कर खत्म करने का प्रयास जानलेवा है। इस आग की चेपेट में जहां किसी भी वाहन के आने की आशंका बनी रहती है वहीं आग का धुंआ भी किसी वाहन को पथ भ्रष्ट करके दुर्घटना का शिकार बना सकता है। इसके अतिरिक्त यह धुंआ पर्यावरण संतुलन बिगाड़ने में जहां महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर देता है वहीं जीवों को भी नष्ट कर देता है। जमीन में ऐसे लाखों तरह के जीव विद्यमान रहते हैं जो उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ाने का काम करते हैं।
