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कोरिया के दोस्त और दुश्मन

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कोरिया के दोस्त और दुश्मन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन ने सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप में एक दूसरे से मुलाक़ात की. भले ही दोनों देश दुश्मनी भुलाकर दोस्त बने हो, लेकिन इसे ट्रंप की कूटनीतिक जीत बताया जा रहा है.

दरअसल, इस बैठक का मकसद परमाणु निरस्त्रीकरण है. यदि किम परमाणु निरस्त्रीकरण की तरफ बढ़े, तो यह ट्रम्प की जीत होगी. इसके बाद अमेरिका, उत्तर कोरिया के सामने निरस्त्रीकरण की शर्त रख कर उससे आर्थिक प्रतिबंध हटा सकता है.

वहीं, यदि परमाणु निरस्त्रीकरण पर उत्तर कोरिया समझौता करता है तो इसका असर उत्तर कोरिया के साथी माने जाने वाले देश चीन और रूस पर पड़ेगा.

बता दें कि तमाम मिसाइल टेस्ट के बावजूद उत्तर कोरिया के चीन से अच्छे संबंध रहे हैं. हालांकि, समय-समय पर चीन उत्तर कोरिया को जरूर चेताता रहा है.

रूस की बात की जाए तो उत्तर कोरिया से उसके संबंध अच्छे रहे हैं. यहां तक कि 2015 में दोनों देशों ने राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर अपने रिश्तों को ईयर ऑफ फ्रेंडशिप भी करार दिया था. अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से शीत युद्ध भी चल रहा है. जिस कारण रूस, उत्तर कोरिया के करीब रहा है.

लेकिन इसके ठीक उलट जापान अपनी पुरानी दुश्मनी भुलाकर उत्तर कोरिया के मुद्दे पर अमेरिका का साथ देता है. जापान समय-समय पर परमाणु हथियारों के टेस्ट पर उत्तर कोरिया को चेतावनी देता रहता है. यहां तक कि जापान ने कुछ समय पहले बॉर्डर पर मिसाइल इंटरसेप्टर भी लगाए थे और प्रशांत महासागर में अपने युद्धपोत तक तैनात कर दिए थे. हालांकि, इसके बावजूद उत्तर कोरिया ने जापान के ऊपर से मिसाइल टेस्ट की थी.

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