बाहरी शिक्षा के साथ आध्यात्मिक शिक्षा का होना भी अति अनिवार्य है

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्री रघुनाथ मंदिर रामलीला ग्राउंड पठानकोट में आयोजत श्री मद् देवी भागवत महांपुराण नवाह ज्ञानयज्ञ के द्वितीय दिवस श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी सुश्री त्रिपदा भारती जी ने दैत्यों के विनाश की गाथा में निहित रहस्यों को बहुत सुंदर ढंग से भगवत पिपासुओं के समक्ष प्रस्तुत किया। साध्वी जी कहा कि अपनी प्रशंसा सुनने से उसके प्रति राग और निंदा सुनने से द्वेष हो जाता है।

वास्तव में यह दोनों पत्न का ही कारण है। साध्वी जी ने समझाते हुए कहा कि आज समाज में जितने भी विघटन हैं उनका कारण विकार ही है। अपने विचारों कों आगे बढ़ाते हुए साध्वी जी ने कहा कि बाहरी शिक्षा के साथ आध्यात्मिक शिक्षा का होना भी अति अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मानव शिक्षक तो बन गया है लेकिन भीतर अंधकार गहरता जा रहा है जो उसके चरित्र को धुलित का रहा है।

साध्वी जी ने कहा कि इसके लिए ब्रहम ज्ञान का होना अति अनिवार्य है। इससे ही नैतिक मूल्यों का निर्माण होता है तभी देश में शांति आ सकती है।

इस समय शहर के गणमान्य व्यक्ति भी कथा प्रसंग को सुनने कि लिए पहुँचे। कथा पंडाल की शेभा देखने योगय है। मंच पर उपस्थित भजन मंडली के द्वारा संगीतमयी भावों को प्रस्तुत किया गया। कथा का समापन प्रभु की पावन आरती के साथ किया।

Share This:

REVIEWS

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    53 + = 60