तीन साल में 134 अवैध कटान व 57 माइ¨नग के केस दर्ज

जिला में अवैध माइ¨नग तथा अवैध कटान का प्रचलन नहीं थम रहा। वन माफिया मौका पाकर या तो वन क्षेत्र से अवैध कटान कर रहा है। वन क्षेत्र के अधीन आते क्षेत्र में लगी दफा-चार का उल्लंघन करते हुए अवैध माइ¨नग को अंजाम दे रहा है। विभाग की कोई योजना वन माफिया को नियंत्रित नहीं कर पा रही। विभागीय स्तर पर कर्मचारियों तथा संसाधनों की कमी अवैध माइ¨नग तथा अवैध कटान के कारोबार को बढ़ावा दे रही है। आगामी दिनों तक शुरू होने वाली सर्द ऋतु में ये प्रक्रिया ओर तेज हो जाएगी। इस बात का साक्षात प्रमाण वन विभाग की ओर से पिछले तीन वर्ष में दर्ज किए गए मामलों से लगता है। विभाग की ओर से अकेले अर्ध पहाड़ी क्षेत्र धारकलां में चक्की दरिया में अवैध माइ¨नग तथा अवैध कटान के दर्जनों मामले दर्ज हुए। कईयों पर कोर्ट में केस भी लगाए गए परन्तु वन माफिया को नियंत्रित नहीं किया जा सका जहां किसी न किसी कोने में इन पर राजनीतिक तथा विभागीय कर्मचारियों का संरक्षण भी दिखता नजर आ रहा है। हालांकि वन विभाग के वर्जित क्षेत्र में कटान तथा अवैध माइ¨नग पर पूरी तरह से रोक है। इस क्षेत्र के अधीन वाले ही किसी की खुद अपनी ही जमीन हो अन्यथा अपने ही लगाए गए वृक्ष क्यों न हो कोई भी व्यक्ति उस क्षेत्र में न तो कटान कर सकता है तथा न ही अपनी खुद की भूमि से विभाग की अनुमति के बिना खुदाई कर सकता है।
अधिकारिक आंकड़े दुनेरा रेंज तीन साल में अवैध कटान के 134 मामले, माइ¨नग के 57, जंगलों में पशुओं को चराने पर 24 मामले दर्ज कर लोगों से 10 लाख 16 हजार 165 रुपये बतौर जुर्माना वसूल किया है। विभाग की ओर से इसके अतिरिक्त जिन लोगों ने जुर्माना नहीं दिया, उनके खिलाफ 34 मामले कोर्ट में दर्ज भी किए गए।
डीएफओ डॉक्टर संजीव तिवारी का कहना है कि विभाग की ओर से अवैध माइ¨नग तथा अवैध कटान करने वाले माफिया पर नकेल कसने के लिए वभाग पहले ही सजग हो चुका है। विभाग की ओर से माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अनिवार्य बनाने के लिए जहां एक ओर अर्ध पहाड़ी क्षेत्र धार, दुनेरा तथा पठानकोट के लोगों से बैठकें की जा रही है वहीं दूसरी ओर विभाग की ओर से 6 टीमें भी बनाई जा चुकी हैं।

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